'क्योंकि...' में मिहिर विरानी की मौत से फैंस को लगा था भारी सदमा, बालाजी ऑफिस के बाहर उमड़ पड़ी थी भीड़

एकता कपूर का क्लासिक कल्ट शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला. यही वजह है कि 25 साल बाद शो का नया सीजन भी लाया गया. इस सीरियल और इसके कैरेक्टर्स से दर्शक दिल की गहराईयों से जुड़े थे. हाल ही में उर्वशी ढोलकिया और श्वेता तिवारी ने क्योकिं सास भी कभी बहू थी में मिहिर विरानी की मौत के सीन को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि जब शो में मिहिर की मौत हुई तो फैंस एकता कपूर के ऑफिस के बाहर जमा हो गए थे. हाल ही में 'माना के हम यार नहीं' के लिए एक राउंड-टेबल कॉन्फ्रेंस के दौरान हितेन तेजवानी, श्वेता तिवारी, उर्वशी ढोलकिया और बी.आर. विजयलक्ष्मी जमा हुए. इस दौरान ही उवर्शी ढोलकिया और श्वेता तिवारी ने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में मिहिर विरानी (अमर उपाध्याय) की मौत से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया.           View this post on Instagram                       A post shared by StarPlus (@starplus) 'बालाजी के गेट पर लोगों का ग्रुप...'उवर्शी ढोलकिया ने कहा- 'उस वक्त सारे शोज में कुछ खास पल थे, ब्रेकथ्रू मूमेंट्स थे. जब क्योंकि में मिहिर मरा, जब उसकी मौत हुई थी तो मेरे सामने, याद है मुझे कि बालाजी ऑफिस में नीचे एक फोन रखा जाता था. वो लाइन बंद ही नहीं हो रही थी. वो फोन बजता ही जा रहा था.' श्वेता तिवारी आगे कहती हैं- 'लोग आ गए थे दरवाजे पर, बालाजी के गेट पर. लोगों का ग्रुप आया था कि मिहिर को वापस लाओ.' मिहिर की मौत का हुआ था खूब विरोधबता दें कि इससे पहले अमर उपाध्याय ने भी खुद मिहिर विरानी के मौत को लेकर दर्शकों का रिएक्शन शेयर किया था. एबीपी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- 'एकता ने मिहिर की मौत वाले पूरे एपिसोड को इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था कि जब आखिरकार ये हुआ, तो हर तरफ अफरा-तफरी मच गई. जब ये एपिसोड पहली बार टेलीकास्ट हुआ, मुझे याद है कि मेरी मां इसे देखकर रो रही थीं और मैं सोच रहा था कि मैं जिंदा हूं, आपके बगल में बैठा हूं. देर रात मुझे बालाजी टेलीफिल्म्स से फोन आया कि उनके ईमेल सर्वर क्रैश हो गए हैं और मिहिर की मौत पर भारी विरोध की वजह से टेलीफोन लाइनें जाम हो गई हैं.' सफेद साड़ियां पहनकर मातम करने पहुंच गई थीं महिलाएंअमर उपाध्याय ने इस दौरान ये भी बताया था कि 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में मिहिर की मौत के बाद महिलाएं सफेद साड़ी पहनकर उनके घर पहुंच गई थीं. उन्होंने कहा था- 'मैं उठा और दरवाजे की घंटी बजी. मेरे घर के बाहर 15-20 औरतें खड़ी थीं, सभी ने सफेद साड़ियां पहन रखी थीं. मुझे देखते ही वो चौंक गईं. जब मेरी मां ने उनसे पूछा, तो उन्होंने बताया कि वो मिहिर की मौत पर शोक मनाने आई हैं. मेरी मां गुस्सा हो गईं. उन्होंने उन्हें डाटकर भगा दिया.'

Oct 27, 2025 - 23:30
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'क्योंकि...' में मिहिर विरानी की मौत से फैंस को लगा था भारी सदमा, बालाजी ऑफिस के बाहर उमड़ पड़ी थी भीड़

एकता कपूर का क्लासिक कल्ट शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला. यही वजह है कि 25 साल बाद शो का नया सीजन भी लाया गया. इस सीरियल और इसके कैरेक्टर्स से दर्शक दिल की गहराईयों से जुड़े थे. हाल ही में उर्वशी ढोलकिया और श्वेता तिवारी ने क्योकिं सास भी कभी बहू थी में मिहिर विरानी की मौत के सीन को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि जब शो में मिहिर की मौत हुई तो फैंस एकता कपूर के ऑफिस के बाहर जमा हो गए थे.

हाल ही में 'माना के हम यार नहीं' के लिए एक राउंड-टेबल कॉन्फ्रेंस के दौरान हितेन तेजवानी, श्वेता तिवारी, उर्वशी ढोलकिया और बी.आर. विजयलक्ष्मी जमा हुए. इस दौरान ही उवर्शी ढोलकिया और श्वेता तिवारी ने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में मिहिर विरानी (अमर उपाध्याय) की मौत से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया.

 
 
 
 
 
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'बालाजी के गेट पर लोगों का ग्रुप...'
उवर्शी ढोलकिया ने कहा- 'उस वक्त सारे शोज में कुछ खास पल थे, ब्रेकथ्रू मूमेंट्स थे. जब क्योंकि में मिहिर मरा, जब उसकी मौत हुई थी तो मेरे सामने, याद है मुझे कि बालाजी ऑफिस में नीचे एक फोन रखा जाता था. वो लाइन बंद ही नहीं हो रही थी. वो फोन बजता ही जा रहा था.' श्वेता तिवारी आगे कहती हैं- 'लोग आ गए थे दरवाजे पर, बालाजी के गेट पर. लोगों का ग्रुप आया था कि मिहिर को वापस लाओ.'

मिहिर की मौत का हुआ था खूब विरोध
बता दें कि इससे पहले अमर उपाध्याय ने भी खुद मिहिर विरानी के मौत को लेकर दर्शकों का रिएक्शन शेयर किया था. एबीपी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- 'एकता ने मिहिर की मौत वाले पूरे एपिसोड को इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था कि जब आखिरकार ये हुआ, तो हर तरफ अफरा-तफरी मच गई. जब ये एपिसोड पहली बार टेलीकास्ट हुआ, मुझे याद है कि मेरी मां इसे देखकर रो रही थीं और मैं सोच रहा था कि मैं जिंदा हूं, आपके बगल में बैठा हूं. देर रात मुझे बालाजी टेलीफिल्म्स से फोन आया कि उनके ईमेल सर्वर क्रैश हो गए हैं और मिहिर की मौत पर भारी विरोध की वजह से टेलीफोन लाइनें जाम हो गई हैं.'

सफेद साड़ियां पहनकर मातम करने पहुंच गई थीं महिलाएं
अमर उपाध्याय ने इस दौरान ये भी बताया था कि 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में मिहिर की मौत के बाद महिलाएं सफेद साड़ी पहनकर उनके घर पहुंच गई थीं. उन्होंने कहा था- 'मैं उठा और दरवाजे की घंटी बजी. मेरे घर के बाहर 15-20 औरतें खड़ी थीं, सभी ने सफेद साड़ियां पहन रखी थीं. मुझे देखते ही वो चौंक गईं. जब मेरी मां ने उनसे पूछा, तो उन्होंने बताया कि वो मिहिर की मौत पर शोक मनाने आई हैं. मेरी मां गुस्सा हो गईं. उन्होंने उन्हें डाटकर भगा दिया.'

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